CGPSC पेपर लीक मामला: पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज

बिलासपुर, 6 अगस्त। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) परीक्षा-2021 के चर्चित पेपर लीक एवं भर्ती अनियमितता मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना अत्यंत गंभीर अपराध है। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, ऐसे मामलों से केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रतियोगी परीक्षाओं पर युवाओं का विश्वास प्रभावित होता है।

CBI ने लगाए गंभीर आरोप

सीबीआई की जांच के अनुसार, जीवन किशोर ध्रुव ने सचिव रहते हुए परीक्षा की गोपनीयता का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए, जिसके आधार पर उसका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ।

जांच के दौरान सीबीआई ने भिलाई स्थित उनके निवास पर छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए। इनमें मुख्य परीक्षा के प्रश्नों से संबंधित उत्तर सामग्री और अन्य साक्ष्य शामिल बताए गए हैं।

बचाव पक्ष ने क्या कहा

बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि जीवन किशोर ध्रुव का नाम मूल एफआईआर में नहीं था। उन्होंने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी आयोग को पहले ही दे दी थी तथा स्वयं को गोपनीय कार्यों से अलग कर लिया था। साथ ही यह भी कहा गया कि वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और सीबीआई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

CBI का पक्ष

सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक वरिष्ठ लोक सेवक थे, जिन पर परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी। एजेंसी के अनुसार, बरामद दस्तावेज और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश की पुष्टि करते हैं।

क्या है मामला

CGPSC-2021 भर्ती परीक्षा में 171 पदों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की गई थी। आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया में अनियमितता कर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और पसंदीदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है।

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